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टीचर और विद्यार्थी के बिच प्यार - Love in teacher and student


अमित एक बहुत ही समझदार और सुंदर लड़का था । और वह अब कॉलेज में पढ़ता था । उसके गाँव सुदूरपुर से कॉलेज तक का रास्ता कोई चालीस किलोमीटर का था, और बसे भी गिनी – चुनी ही थी । अमित बी. ए. द्वितीय वर्ष का छात्र , हर सुबह इसी समय गुजरता था । पढ़ने की लग्न ऐसी थी कि मिलों का सफर भी उसके हौसले को डिगा नहीं पाता था। उसका सपना था, पढ़- लिखकर अपने गाँव की तस्वीर बदलना।

 कॉलेज मे हिंदी साहित्य की अध्यापिका थी प्रिया मैडम उनकी खूबसूरती के पर्चे कॉलेज मे थे , लेकिन उनकी आँखों मे एक अनकही उदासी तैरती रहती थी, जिसे कम ही लोग पढ़ पाते थे । अमित उनमे से एक था। वह प्रिया मैडम की कक्षा नही छोड़ता था। उनके पढ़ने का अंदाज , उनकी आवाज की मिठास , और हिंदी के प्रति उनका प्रेम , अमित को मोह लेता था । वह चुपचाप उन्हे देखता , उनके हर शब्द को अपने मन मे उतरता ।

 धीरे – धीरे प्रिया मैडम भी अमित को नोटिस करने लगी। उसकी आँखों मे ज्ञान की प्यास , उसकी विनम्रता और उसकी लगन उन्हे प्रभावित करती थी। कभी- कभी कक्षा के बाद अमित उनसे कुछ सवाल पूछने रुक जाता था, और प्रिया भी बड़े धैर्य से उसके सवालों के जवाब देती । इन छोटी-छोटी मुलाकातों मे कब एक अनकहा सा रिश्ता पनपने लगा, दोनों को ही पता नही चला।

 प्रिया की जिंदगी बाहर से जितनी सुंदर दिखती थी, अंदर से उतनी ही खोखली थी । उसका पति सुरेश , एक नंबर का शराबी और जुआरी था,। रोज रात को शराब पीकर घर आता और प्रिया पर हाथ उठाता । प्रिया की सिसकियाँ बंद दरवाजों के पीछे ही घुटकर रह जाती थी । उसने कई बार यह सब छोड़कर जाने की सोची , पर समाज का डर और अकेलेपन का खौफ उसे रोक लेता।

 एक दिन कॉलेज मे मुशयरा था । अमित ने एक दिन एक कविता पढ़ी, जिसका शीर्षक था, अधूरी चाहत । कविता मे प्रेम , विरह और उम्मीद का ऐसा मार्मिक चित्रण था कि प्रिया जी की आंखे भर आई। उस कविता मे उन्हे अपनी ही जिंदगी की झलक दिखी । कार्यक्रम के बाद उन्होंने अमित को बुलाया और उसकी कविता की बहुत तारीफ की। उस दिन पहली बार उनकी आँखों मे अमित के लिए प्रशंसा के साथ – साथ एक अजीब सी अपनापन भी था।

 बरसात का मौसम शुरू हो चुका था। एक शाम , कॉलेज से लौटते वक्त आसमान मे काले बादल ऐसे घिरे कि लगा जैसे रात हो गई हो। अमित बस स्पॉट ओर खड़ा था, लेकिन दूर – दूर तक बस का कोई निशान नही था। अचानक मुसलाधर बारिश शुरू हो गई । वह पास ही एक पुरानी , टूटी – फूटी झोपड़ी मे सर छुपाने के लिए भागा ।

 कुछ देर बाद, उसी झोपड़ी मे भीगती हुई प्रिया जी भी आ पहुँची। उनकी कार रास्ते मे खराब हो गई थी और मोबाइल भी डिस्चार्ज था। अमित उन्हे देखकर चौंक गया। प्रिया जी भी अमित को वहाँ देखकर हैरान थी, पर इस अनजान जगह पर एक परिचट चेहरे को देखकर उन्हे थोड़ी राहत मिली।

 झोपड़ी बहुत छोटी सी थी और बाहर इतनी तेज की बारिश कि रकने का नाम नही ले रही थी , ठंडी हवा के झोंके बदन मे सिरहन पैदा कर रहे थे। दोनों एक दम चुप चाप बैठे थे बस बारिश की आवाज ही उनके बीच थी। धीरे – धीरे प्रिया जी ने अपनी जिंदगी की कड़वी सच्चयी अमित को बतानी शुरू की। अपने पति के अत्याचार , अपने अधूरे सपने , अपनी घुटन । अमित सब सुनता रहा, उसकी आँखों मे प्रिया के लिए सहानुभूति और गहरा दर्द था,।

 प्रिया जी बोलते – बोलते रो पड़ी। अमित ने हिम्मत करके उनका हाथ थामा। उस स्पर्श से सहानुभूति दी। अपनापन था। ना जाने कब वे दोनों एक दूसरे के इतने करीब आ गए। कि उन्हे दुनिया और जहाँ कि सुध ही नही थी । उस तूफ़ानी बरसात कि रात मे , उस छोटी सी झोपड़ी मे दो टूते हुए दिल एक दूसरे के सहारे जुड़ गए। समाज की नजर मे यह गलत था, पर उस पल उनके लिए वही सच था, और वही सुकून बन गया था। वह प्यार का संबंध केवल शारीरिक नही , बल्कि दो आत्माओ का मिलन था जो दुनिया के रिवाजों से परे , एक दूसरे मे अपना अस्तित्व ढूंढने लगा था।

 उस रात झोपड़ी मे समय बिताने के बाद प्रिया और अमित का रिश्ता और भी गहरा और मजबूत हो गया। वे दोनों छुप – छुप कर मिलने लगे । कॉलेज की लाइब्रेरी , कैंटीन का कोना , या शहर से दूर कोई शांत जगह उनकी मुलाकातों का ठिकाना बन गई। अमित के प्यार ने जैसे प्रिया को एक नया जीवन दे दिया। उसकी आँखों की उदासी अब चमक मे बदलने लगी थी । वह फिर हंसने और बोलने , जीने लगी थी।

 लेकिन यह खुशियां ज्यादा दिन तक तिक नही सकी। उनके प्रेम की भनक प्रिया के पति सुरेश को लग गई । एक दिन जब अमित कॉलेज से लौट रहा था तो, सुरेश ने अपने गुंडों के साथ मिल कर अमित को बहुत बुरी तरह से पिटवाया । अमित वही बेहोश खून से लत पत सड़क के किनारे पड़ा मिला ।

 जब प्रिया को यह खबर मिल तो, वह दौड़ी – दौड़ी अस्पताल पहुंची । अमित की वो दुर्दशा देख कर वह टूट गई थी। उसके लगातार आँसू निकल रहे थे । उसी समय प्रिया ने तय कर लिया की वह सुरेश के साथ एक मिनट भी नही रहेगी । वह उस नरक भरी जिंदगी से आजाद होकर रहेगी । अमित के लिए और अपने प्यार के लिए।

 अमित के ठीक होते ही प्रिया ने सुरेश का घर छोड़ दिया और वहाँ से चली गई । उसने अपने कुछ जरूरी समान और गहने भी लिए और फिर अमित के पास आ गई। समाज ने उँगलियाँ उठाई और बहुत सी बातें बनाई , पर प्रिया को किसी से कोई फरक नही पड़ा। उसका प्यार अमित के लिए सच्चा था और वह अमित को किसी भी कीमत मे खोना नही चाहती थी।

 दोनों ने फैसला किया कि वह इस शहर और इन यादों से कही दूर चले जाएंगे । एक दिन सुबह – सुबह वह दोनों पास के एक दुर्गा मंदिर मे पहुंचे । वहाँ उन दोनों ने माता रानी को साक्षी मान कर एक दूसरे को पति और पत्नी के रूप मे स्वीकार किया । ना को बैंड बाजा था, ना कोई बराती। बस दो सच्चे दिल और भगवान का आशीर्वाद।

 शादी के बाद वे दोनों दूर – दराज के एक गाँव मे चले गए , जो एक बड़े से झरने के पास बसा था । गाव का नाम था , झरनापुर । वहाँ की हवा मे ताजगी थी। पानी मे संगीत था और लोगों के दिलों मे सादगी थी । अमित ने गाँव के बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया और प्रिया घर संभालती । उसने छोटी सी जगह पर सब्जियां उगानी शुरू कर दी ।


 उनकी दुनिया बहुत छोटी थी पर बहुत सारी खुशियां थी। सुबह झरने की मधुर आवाज से उनकी आंखे खुलती थी । अमित बच्चों को पढ़ाने चला जाता और प्रिया घर मे लग जाती। दोपहर मे अमित लौटता तो दोनों साथ मे खाना खाते , ढेर सारी बातें करते , हँसते । शाम को वह दोनों झरने के किनारे टहलने जाते थे , डूबते हुए सुरज को देखते और अपने आने वाले कल के सपने बुनते।

 गाँव वालों ने बहु उन्हे धीरे – धीरे अपना लिया था। अमित को पढ़ाने का तरीका और प्रिया का मिलनसार स्वभाव सबही को पसंद था। उन्हे अब किसी बात का डर नही था। किसी की को परवाह नही था। उनका प्यार ह उनकी ताकत थी , उनका विश्वास था।

 पर कभी कभी प्रिया को सुरेश का अत्याचार और लोगों के ताने बहुत याद आते थे और वह बहुत उदास हो जाति पर अमित का प्यार उन सभी बुरी बातों और यादों पर मरहम लगा देता। अमित भी खुद को बहुत भाग्यशाली इंसान समझता था क्योंकि, उसे प्रिया जैसी पत्नी मिली । वह जानता था की प्रिया ने उसके लिए कितना कुछ सहा है , कितना कुछ छोड़ा है।

 उनकी झोपड़ी छोटी थी, पर उसमे प्यार और सुकून की कोई कमी नही थी। झरने का संगीत उनके जीवन का संगीत बनगया था । वे के दूसरे के बिना अब अधूरे से थे , और साथ मे तो एक पूरी कि पुरी कायनात थे । उनका प्यार उस झरने की तरह ही निर्मल , पवित्र और अविरल बहता रहा, जिसने समाज की बनाई सभी दीवारों को तोड़कर अपनी एक खूबसूरत दुनिया बसा ली थी। यहकहनी एक अटूट प्रेम और विश्वास , एक नई शुरुआत कि दास्ता है, जो यह बताती है कि सच्चा प्यार हर मुश्किल को पार कर अपनी मंजिल पा ही लेता है।


Date: 2025-09-01 00:11:09 (251 Days Ago) | Views: 5139

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